कलाकार होना एक यात्रा है। एक ऐसी यात्रा जो कल्पना, जुनून और निरंतर अभ्यास से
संवरती है। यदि आप एक उदीयमान कलाकार हैं, तो याद रखें कि हर महान कलाकार कभी न कभी
इसी मुकाम पर था जहाँ आज आप हैं। सृजन की शक्ति आपके भीतर एक अनूठी दृष्टि है, एक
कहानी है जिसे दुनिया तक पहुँचाना आपका कर्तव्य है। अपनी कला के माध्यम से भावनाओं
को अभिव्यक्त करें, विचारों को आकार दें और अपने भीतर छुपी संभावनाओं को उजागर
करें।
संघर्ष और धैर्य के साथ हर कलाकार को संघर्षों से गुज़रना पड़ता है। अस्वीकृति
और कठिनाइयाँ इस राह के अभिन्न अंग हैं। लेकिन याद रखें, हर कठिनाई आपको और मजबूत
बनाती है। धैर्य रखें, अभ्यास करें और अपनी कला में निरन्तर निखार लाने के लिए हर
दिन कुछ नया सीखें। प्रेरणा और अनुशासन में प्रेरणा महत्वपूर्ण है, लेकिन अनुशासन
के बिना यह अधूरी है।
अपनी कला को नियमित रूप से निखारें, एक रूटीन बनाएं और उसे
पूरी ईमानदारी से निभाएं। महानता एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन निरंतर प्रयास इसे
संभव बनाती है। अपनी आवाज़ खोजें दूसरों से प्रेरणा लें लेकिन उनकी नकल न करें। अपनी
शैली विकसित करें, अपने अंदर की आवाज़ को पहचानें और उसे अपनी कला में उकेरें। यही
आपको सबसे अलग और विशिष्ट बनाएगा।
साझा करें और सीखें अपनी कला को दूसरों के साथ
साझा करें, प्रतिक्रिया लें और उसे सुधारने का प्रयास करें। नए विचारों और नई
तकनीकों के प्रति खुले रहें। प्रत्येक कलाकार हर सीखने की प्रक्रिया में होता है और
यही उसे विकसित करता है। सपनों को मत छोड़िए जोश और समर्पण के साथ आगे बढ़ते रहें। जब
भी संदेह हो, यह याद करें कि आपकी कला किसी न किसी के लिए प्रेरणा बन सकती है। इस
सफर में आत्मविश्वास और जुनून बनाए रखें, क्योंकि एक न एक दिन आपकी कला ही आपकी
पहचान बनेगी।
नम्रता ने भी एक ऐसे मंच की कल्पना की जिसमें ब्रज के उदीयमान
कलाकारों को प्रोत्साहित किया जा सके। प्रत्येक रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम व
ब्रज तराना में हिन्दी गीत कला साहित्य से सम्बन्धित प्रदर्शनी भी लगाई जाती है।
जिसमें स्थानीय प्रतिभावान गायक कलाकारों को अपनी प्रस्तुति देने का अवसर प्रदान
किया जाता है। इसमें ऐसे कलाकार जो अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर पा सकते हैं।
यहां स्थानीय कलाकारों द्वारा शानदार प्रदर्शन कर मधुर संगीत के मध्य गायकी का
प्रदर्शन करने का अवसर पा कर दर्शकों को मुत्रमुग्ध कर सकते हैं।
हाल ही में मथुरा
वृन्दावन की सांसद श्रीमती हेमा मालिनी व उ0 प्र0 ब्रज तीर्थ विकास परिषद के
उपाध्यक्ष शैलजा कान्त मिश्र जी ने ब्रजकला चौपाल के मंच पर पहंच कर नम्रता सिंह के
प्रयास को सराहा। ब्रज कला चौपाल संस्था की संस्थापिका नम्रता सिंह ने बताया कि
मथुरा में ब्रज कला चौपाल की स्थापना कलाकारों को दुनिया के सामने लाने का एक
प्रयास है। लम्बे समय से नम्रता ने प्रत्येक छोटे बड़े मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां
दी हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के 5251 वें जन्मोत्सव, ब्रजरज उत्सव, या रंगोत्सव के मंच
से नम्रता ने अपनी प्रस्तुतियां दी हैं। जिसमें उभरती हुई गायक कलाकार नम्रता सिंह
की प्रस्तुति सभी के मन को भा गयी। नम्रता गरीब, असहाय व वृद्ध, बीमार लोगों की मदद
करने के साथ-साथ वृद्ध महिलाओं के प्रति भी दया व उनके बीच में जाकर उनकी हर सम्भव
मद्द करने का कार्य भी करती है। पशुओं के प्रति भी दया का भाव रखती है।
नम्रता ने
बताया कि इस मंच पर बहुत सारे बच्चे, बड़े, बूढ़े जिनका सपना था कि वे कला क्षेत्र
में कुछ करें, उनको यहां एक मंच मिल गया है। जिस पर वे स्वतंत्र रूप से अपनी कला का
प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल मथुरा-वृन्दावन शहर में प्रत्येक
रविवार शाम 5 बजे से जवाहर बाग, (ब्रज तीर्थ ऑफिस के पास) में यह कार्यक्रम होता
है। इस रोमांचक मंच पर बच्चे युवा अपनी प्रतिभा को निखार सकते है। नम्रता सिंह ने
बताया कि संस्था का उद्देश्य समाज को मानसिक स्वस्थ्य बनाया जा सके। इसके लिए लोगों
को जागरूक करना भी जरूरी है।
‘‘सफलता मिलना आसान है, किन्तु उसको बनाये रखना कठिन
है’’ किसी ने ठीक ही कहा है, किसी-किसी की उम्र गुजर जाती है प्रसिद्धि पाने में,
यह जितनी जल्दी मिलती है, उतनी ही तेज़ी से वापस भी चली जाती है। हर किसी व्यक्ति के
बस में नहीं है इसे संजोकर रखना। किसी भी परिस्थिति में सफलता को अपने व्यवहार पर
हावी नहीं होने देना चाहिए। आप कितने भी सफल व्यक्ति क्यूँ ना बन जाएं परन्तु आपको
अपनी वास्तविकता कभी नहीं भूलनी चाहिए। समय और परिस्थिति के साथ आगे जरूर बढ़ना
चाहिए, किन्तु इस बीच सफलता दिमाग़ पर नहीं बैठनी चाहिए। व्यक्ति का अहम्, घमंड उसको
कहीं का नहीं छोड़ता। आप जितने अपने पैरों को ज़मीन पर रखकर चलेंगे, आपको उतनी ही
क़ामयाबी की राह मजबूती से मिलेगी।
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